20 Dec. 2025, PM Kusum Yojana: सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संकल्पित पीएम कुसुम योजना देश भर में अबाध गति से चल रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हो रहे हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा के माध्यम से सशक्त बनाना, ऊर्जा और जल सुरक्षा प्रदान करना तथा भारत के नवकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान देना है।
पीएम कुसुम योजना क्या है?
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम-कुसुम) योजना मार्च 2019 में शुरू की गई थी। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना का लक्ष्य मार्च 2026 तक 34,800 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ना है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 34,422 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
वित्त वर्ष 2025 में योजना ने रिकॉर्ड प्रगति दर्ज की है। कंपोनेंट बी के तहत 4.4 लाख पंप स्थापित किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.2 गुना अधिक है। वहीं कंपोनेंट सी के अंतर्गत 2.6 लाख पंप सोलराइज्ड किए गए, जो वित्त वर्ष 2024 से 25 गुना अधिक है। अब तक 4.11 लाख से अधिक किसान इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं।
योजना के तीन प्रमुख घटक
कंपोनेंट-ए (10,000 मेगावाट विकेन्द्रीकृत सौर संयंत्र): इस घटक के तहत किसान, किसानों के समूह, सहकारी समितियां, पंचायतें, किसान उत्पादक संगठन और जल उपयोगकर्ता संघ अपनी बंजर या बेकार भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित कर सकते हैं। इन संयंत्रों को खेती योग्य भूमि पर भी स्टिल्ट पर लगाया जा सकता है, जिससे नीचे फसलें उगाई जा सकती हैं। किसान उत्पादित बिजली को डिस्कॉम को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। संयंत्र उप-स्टेशन के 5 किलोमीटर की दूरी के भीतर स्थापित किए जाएंगे।
कंपोनेंट-बी (14 लाख स्टैंड-अलोन सोलर पंप): इस घटक के अंतर्गत किसानों को स्टैंड-अलोन सोलर पंप स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। केंद्र सरकार बेंचमार्क लागत का 30 प्रतिशत अनुदान देती है, राज्य सरकार 30 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करती है और किसान को केवल 40 प्रतिशत राशि का भुगतान करना होता है। यह व्यवस्था किसानों को डीजल पर निर्भरता से मुक्त करती है और सिंचाई लागत में भारी कमी लाती है।
कंपोनेंट-सी (35 लाख ग्रिड कनेक्टेड पंप का सोलराइजेशन): इस घटक में मौजूदा ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सोलराइजेशन किया जाता है, जिसमें फीडर स्तर पर सोलराइजेशन भी शामिल है। इससे किसानों को दिन के समय 8 घंटे तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है और बिजली की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को अनेक प्रकार के लाभ मिल रहे हैं। सोलर पंप स्थापना पर 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है, जबकि 30 प्रतिशत राशि ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाती है। किसान को केवल 10 प्रतिशत राशि का ही भुगतान करना होता है।
डीजल और परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता में भारी कमी आई है। सोलर पंप से बिजली की खपत कम होने से किसानों के खर्च में उल्लेखनीय कटौती हुई है। कंपोनेंट-ए के तहत किसान अधिशेष बिजली ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। सोलर पंप 5 वर्षों तक निःशुल्क रखरखाव के साथ आते हैं और इनकी स्थापना एवं संचालन अत्यंत सरल है।
राज्यों में योजना का क्रियान्वयन
देशभर के विभिन्न राज्यों में पीएम कुसुम योजना तेजी से लागू की जा रही है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में योजना के उत्कृष्ट परिणाम सामने आ रहे हैं। मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अनेक घरों, शिक्षा संस्थानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली प्राप्त की जा रही है। जगह-जगह सौर ऊर्जा के प्लांट लग रहे हैं, जो एक अत्यंत सकारात्मक संकेत है।
कर्नाटक सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में पीएम-कुसुम कंपोनेंट-बी योजना के तहत 40,000 ऑफ-ग्रिड सोलर पंप सेट स्थापित करने की घोषणा की है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बढ़ी हुई सब्सिडी से किसानों की आत्मनिर्भरता बढ़ाने और सतत ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
आवेदन प्रक्रिया एवं पात्रता
योजना के लिए व्यक्तिगत किसान, किसानों के समूह, सहकारी समितियां, पंचायतें, किसान उत्पादक संगठन और जल उपयोगकर्ता संघ आवेदन कर सकते हैं। आवेदक के पास कृषि भूमि का स्वामित्व या उपयोग का अधिकार होना आवश्यक है।
आवेदन के लिए किसानों को अपने राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। आधार कार्ड, भूमि स्वामित्व प्रमाण, बिजली बिल, बैंक विवरण जैसे आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। राष्ट्रीय पोर्टल pmkusum.mnre.gov.in पर भी योजना की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार का संकल्प
राज्य सरकारें प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ाने के लिए हर स्तर पर कार्य कर रही हैं। सोलर पैनल का उपयोग करने वाले हितग्राहियों को सब्सिडी दिलाने में भी सरकार सहयोग कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि देश सौर ऊर्जा, बायोगैस और ग्रीन एनर्जी की ओर अग्रसर हो।
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश करने वाले औद्योगिक समूहों को आह्वान किया जा रहा है कि वे देश को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में शीर्ष पर आगे ले जाएं। इसके लिए सरकार हर तरह की मदद करने के लिए तत्पर है। इससे जहां सौर ऊर्जा का दायरा बढ़ेगा, वहीं निवेश भी आएगा और बिजली की बचत भी होगी।
योजना का भविष्य
पीएम कुसुम योजना का वर्तमान चरण मार्च 2026 में समाप्त होगा, जिसके बाद योजना के चरण-2 को शुरू करने की योजना है। भारत सरकार अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के साथ मिलकर इस योजना को अफ्रीका और द्वीप राष्ट्रों तक विस्तारित करने की दिशा में कार्य कर रही है।
केंद्रीय बजट 2025-26 में पीएम कुसुम योजना के लिए 2,600 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो वित्त वर्ष 2024-25 के संशोधित अनुमान 2,525 करोड़ रुपये से अधिक है। यह बढ़ा हुआ बजट योजना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
निष्कर्ष
पीएम कुसुम योजना किसानों के लिए एक क्रांतिकारी पहल है जो न केवल उनकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रही है। सौर ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण में योगदान के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि हो रही है। योजना की सफलता से स्पष्ट है कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। इच्छुक किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा विभाग या स्थानीय डिस्कॉम कार्यालय से संपर्क करें और इस लाभकारी योजना का हिस्सा बनें।
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