Ladki Bahin Yojana: केवायसी के बाद भी नहीं मिला पैसा! हजारों लाड़की बहनें परेशान, क्या है पूरा मामला?

महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री Mazi Ladki Bahin Yojana में बड़ी अफरा-तफरी मची है। सरकार ने नवंबर और दिसंबर की किश्तें जारी करने का दावा किया है, लेकिन राज्य भर की हजारों पात्र महिलाओं को अभी तक पैसे नहीं मिले हैं। eKYC की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 थी और कई लाभार्थियों ने समय पर सत्यापन भी पूरा कर लिया था, फिर भी उनके खाते खाली हैं।

सरकार का पक्ष

महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने बताया कि सरकार ने पात्र लाड़की बहनों को नवंबर और दिसंबर की दोनों किश्तें वितरित कर दी हैं। महापालिका चुनाव के मतदान से पहले ही पात्र महिलाओं के खाते में पैसे जमा हो गए हैं।

मूल रूप से दो महीने की राशि एक साथ जमा की जानी थी, लेकिन निर्वाचन आयोग ने अग्रिम राशि जमा करने पर रोक लगा दी। इसलिए सरकार ने केवल नियमित किश्तें भेजी हैं।

निर्वाचन आयोग का हस्तक्षेप

पिछले साल विधानसभा चुनाव के समय योजना की दो किश्तें एक साथ दी गई थीं, जिस पर विपक्ष ने जमकर आलोचना की थी। इस बार भी नवंबर और दिसंबर की राशि एकसाथ देने की योजना थी।

हालांकि, विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई। कांग्रेस ने राज्य निर्वाचन आयोग में इस संदर्भ में शिकायत दर्ज की। परिणामस्वरूप, सरकार ने अब केवल नवंबर और दिसंबर की नियमित किश्त भेजी है।

जनवरी की किश्त का इंतजार

जनवरी महीने की किश्त अभी तक नहीं भेजी गई है। अब जनवरी का पैसा कब आएगा, इस बारे में सरकार ने अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। लाभार्थी इस अनिश्चितता से परेशान हैं।

eKYC की समस्याएं

कई महिलाओं को eKYC प्रक्रिया में भी दिक्कतें आ रही हैं। पोर्टल पर लॉगिन करने में समस्या, OTP न आना, दस्तावेज अपलोड न होना जैसी तकनीकी परेशानियां सामने आ रही हैं।

31 दिसंबर की डेडलाइन के बाद कई पात्र महिलाएं इस सुविधा से वंचित रह गई हैं। उन्हें अपनी पात्रता साबित करने में कठिनाई हो रही है।

पात्रता मानदंड में भ्रम

कुछ मामलों में पात्रता मानदंड को लेकर भी भ्रम है। चार पहिया वाहन न होने के बावजूद कुछ महिलाओं को पैसे नहीं मिल रहे। आय प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच में देरी भी एक कारण हो सकता है।

सरकार ने जो पात्रता शर्तें निर्धारित की हैं, उनके कार्यान्वयन में स्पष्टता की कमी दिख रही है। कई बार सही दस्तावेज होने के बावजूद तकनीकी कारणों से आवेदन अटक जाते हैं।

बैंक खाते से जुड़ी समस्याएं

कुछ लाभार्थियों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं हैं या खाते निष्क्रिय हो गए हैं। इससे भी राशि ट्रांसफर में बाधा आती है। DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) प्रणाली सही तरीके से काम करने के लिए बैंक खाते का सक्रिय और वैलिडेटेड होना जरूरी है।

राजनीतिक विवाद

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि यह योजना चुनावी लाभ के लिए चलाई जा रही है। किश्तों का समय चुनाव के साथ जोड़ना इस आरोप को बल देता है।

सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि यह महिला सशक्तिकरण की योजना है और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। हालांकि, किश्तों के वितरण का समय और तरीका विवाद का विषय बना हुआ है।

लाभार्थियों के लिए सुझाव

यदि आपको भी किश्त नहीं मिली है तो पहले पोर्टल पर अपना स्टेटस चेक करें। eKYC पूर्ण है या नहीं, यह सुनिश्चित करें। अपने बैंक खाते की स्थिति जांचें और सुनिश्चित करें कि वह आधार से लिंक और सक्रिय है।

यदि सब कुछ ठीक है फिर भी पैसे नहीं आ रहे तो अपने ग्राम सेवक या संबंधित कार्यालय से संपर्क करें। शिकायत दर्ज कराएं और अपने दस्तावेजों की प्रतियां साथ रखें।

आगे की राह

सरकार को इस मामले में तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए। किन लाभार्थियों को पैसे नहीं मिले और क्यों, इसकी पारदर्शी जानकारी होनी चाहिए। जनवरी की किश्त कब आएगी, इसकी घोषणा भी जल्द होनी चाहिए।

तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए हेल्पलाइन और सपोर्ट सिस्टम मजबूत करना होगा। eKYC प्रक्रिया को और सरल बनाने की जरूरत है।

निष्कर्ष

लाडकी बहीण योजना महाराष्ट्र की महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण योजना है। हालांकि, वर्तमान समस्याएं लाभार्थियों के विश्वास को कमजोर कर रही हैं। सरकार को जल्द से जल्द इन मुद्दों का समाधान करना होगा। पात्र महिलाओं को उनका हक मिलना चाहिए और प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर महिलाओं के हित में काम करना सभी की जिम्मेदारी है।

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