सरकारी कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग लगातार मांग कर रहा है कि Old Pension Scheme (OPS) को फिर से लागू किया जाए। राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने अपने कर्मचारियों के लिए OPS बहाल कर दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार भी इसे देशभर में दोबारा लागू करेगी? दिसंबर 2025 में संसद में इस मुद्दे पर सरकार का रुख साफ हो गया है।
संसद में सरकार का स्पष्ट जवाब
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में साफ शब्दों में कहा कि NPS और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम शुरू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। यह बयान उन करोड़ों कर्मचारियों के लिए निराशाजनक है जो OPS की बहाली की उम्मीद लगाए बैठे थे।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन राज्यों ने OPS बहाल की है, उन्हें PFRDA कानून और नियमों के तहत NPS में जमा किए गए कर्मचारी और सरकार के योगदान तथा उस पर मिलने वाला रिटर्न वापस नहीं मिलेगा। यानी OPS बहाल करने वाली राज्य सरकारों को केंद्र के पास जमा NPS फंड नहीं मिलेगा, जिससे इन राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
क्या है OPS और क्यों चाहते हैं कर्मचारी?
ओल्ड पेंशन स्कीम 2004 से पहले लागू थी। इसमें रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को उनकी अंतिम सैलरी का 50% तय पेंशन मिलती थी, जिसे हर वेतन आयोग के साथ बढ़ाया जाता था। इसमें कर्मचारियों को कोई योगदान नहीं देना पड़ता था और सारी जिम्मेदारी सरकार की होती थी। साथ ही महंगाई भत्ता, फैमिली पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे लाभ भी शामिल थे।
1 जनवरी 2004 से केंद्र सरकार ने OPS को बंद कर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लागू किया। NPS एक डिफाइंड कंट्रीब्यूशन स्कीम है जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं और रिटायरमेंट के समय मिलने वाली पेंशन शेयर बाजार के रिटर्न पर निर्भर करती है। इसमें कोई गारंटीड पेंशन नहीं होती, जो कर्मचारियों की मुख्य चिंता है।
UPS: NPS और OPS के बीच का विकल्प
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की है। यह एक हाइब्रिड मॉडल है जो OPS और NPS दोनों की खूबियों को मिलाता है। UPS की प्रमुख विशेषताएं हैं:
गारंटीड पेंशन: हर कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद उसके आखिरी 12 महीने के वेतन और महंगाई भत्ते के कुल का 50% पेंशन के रूप में अनिवार्य रूप से मिलेगा।
न्यूनतम पेंशन गारंटी: कम से कम 10 साल की सेवा पर ₹10,000 महीने की गारंटीड पेंशन का प्रावधान है।
फैमिली पेंशन: कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को पेंशन मिलती रहेगी।
महंगाई राहत: पेंशन पर महंगाई भत्ता भी लागू होगा, जिससे मुद्रास्फीति के अनुसार पेंशन बढ़ेगी।
ग्रेच्युटी और एकमुश्त भुगतान: रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी के साथ एकमुश्त राशि भी मिलेगी।
स्विच करने का विकल्प: NPS में शामिल कर्मचारियों को UPS में आने और फिर वापस NPS में लौटने का विकल्प दिया गया था, जिसकी अंतिम तिथि 30 नवंबर 2025 थी।
कितने कर्मचारियों ने चुना UPS?
सरकार ने बताया कि 30 नवंबर 2025 तक कुल 1,22,123 केंद्रीय कर्मचारियों ने UPS को चुना है। इसमें नए कर्मचारी, मौजूदा कर्मचारी और पहले रिटायर हो चुके कर्मचारी भी शामिल हैं। हालांकि, लगभग 23 लाख पात्र केंद्रीय कर्मचारियों में से केवल 1.22 लाख का UPS चुनना दिखाता है कि अधिकांश कर्मचारी अभी भी OPS की बहाली की उम्मीद लगाए हुए हैं।
UPS में योगदान वापस नहीं मिलेगा
संसद में एक और महत्वपूर्ण सवाल पूछा गया था कि क्या UPS में कर्मचारियों की सैलरी से कटने वाला योगदान रिटायरमेंट पर वापस मिलेगा। सरकार ने स्वीकार किया कि UPS में शामिल होने के बाद सैलरी से कटे योगदान को सीधे लौटाने का प्रावधान नहीं है।
हालांकि, UPS के नियमों के अनुसार, कर्मचारी या उनके जीवनसाथी को रिटायरमेंट के समय कुल कॉर्पस का 60% तक निकालने का विकल्प मिलेगा। लेकिन ऐसा करने पर उन्हें मिलने वाली मासिक पेंशन में कटौती होगी। यह प्रावधान उन कर्मचारियों के लिए है जिन्हें रिटायरमेंट के समय एकमुश्त बड़ी राशि की जरूरत होती है।
राज्यों को NPS फंड क्यों नहीं मिलेगा?
जिन राज्यों ने OPS बहाल की है, उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की थी कि NPS में जमा फंड वापस कर दिया जाए। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि PFRDA एक्ट और संबंधित नियमों के तहत यह संभव नहीं है। NPS में जमा योगदान और उस पर मिला रिटर्न पेंशन फंड में ही रहेगा और राज्यों को वापस नहीं किया जाएगा।
इससे राज्य सरकारों पर दोहरा बोझ पड़ेगा – एक तरफ उन्हें OPS के तहत कर्मचारियों को पूरी पेंशन देनी होगी, दूसरी तरफ NPS में जमा रकम भी नहीं मिलेगी। यह राज्यों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है।
आगे क्या?
केंद्र सरकार का रुख साफ है कि OPS वापस नहीं आएगी। UPS को एक संतुलित विकल्प के रूप में पेश किया गया है जो कर्मचारियों को गारंटीड पेंशन देता है और सरकार के लिए भी वित्तीय रूप से टिकाऊ है। हालांकि, कर्मचारी संगठन और यूनियन अभी भी OPS की बहाली के लिए दबाव बनाए हुए हैं।
सरकारी कर्मचारियों को अब UPS के प्रावधानों को समझना होगा और तय करना होगा कि यह उनकी रिटायरमेंट की जरूरतों को पूरा करता है या नहीं। जो कर्मचारी NPS में हैं, उन्हें अपनी स्थिति के अनुसार UPS में स्विच करने का विकल्प मिल चुका है।
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