बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को लेकर बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। जिला प्रशासन ने योजना में पंजीकृत परिवारों की जांच-पड़ताल तेज कर दी है और अधिकारियों को 15 जनवरी तक इस प्रक्रिया को पूर्णता देने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
फर्जी लाभार्थियों की भरमार का खुलासा
योजना के तहत किए गए स्वयं-सर्वेक्षण में गंभीर खामियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि जिन लोगों के पास पहले से पक्का मकान मौजूद है, उन्होंने भी इस सरकारी योजना में अपना नाम जुड़वा लिया था। यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि इससे वास्तविक जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से वंचित रह सकते थे।
सूत्रों के मुताबिक, लगभग 65,000 परिवारों ने खुद से सर्वेक्षण फॉर्म भरे थे। हालांकि, विस्तृत जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इनमें से करीब 50,000 आवेदन पूरी तरह फर्जी या अयोग्य हैं। यानी लगभग तीन-चौथाई स्वयं-सर्वेक्षण आवेदन झूठे साबित हो रहे हैं।
त्रिस्तरीय जांच व्यवस्था लागू
योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने तीन चरणों में सत्यापन की व्यवस्था की है। पहले चरण में मैदानी कर्मचारियों ने घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा किया था। अभी दूसरे चरण में प्रखंड स्तर पर गहन जांच चल रही है। इसके बाद तीसरे और अंतिम चरण में जिला मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी पूरे डेटा की समीक्षा करेंगे।
यह बहुस्तरीय प्रणाली इसलिए अपनाई गई है ताकि किसी भी स्तर पर होने वाली गड़बड़ी या लापरवाही को पकड़ा जा सके और केवल योग्य परिवारों को ही योजना का फायदा मिले।
धीमी रफ्तार पर नाराजगी
जिला उपायुक्त ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा है कि ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से साफ दिख रहा है कि सत्यापन कार्य बेहद सुस्त गति से हो रहा है। अब तक मात्र आधा काम ही पूरा हो पाया है, जबकि समय सीमा नजदीक आ चुकी है।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे दिन-रात मेहनत करके शेष कार्य को जल्द से जल्द निपटाएं। लापरवाही या देरी के लिए कोई बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विशाल संख्या में आवेदन
इस साल के सर्वेक्षण में जिले भर से कुल 4,43,519 परिवारों ने पंजीकरण कराया था। प्रखंडों में सबसे ज्यादा आवेदन पारू क्षेत्र से आए जहां 44,958 परिवारों ने फॉर्म भरे। दूसरी ओर मुरौल प्रखंड में सबसे कम 7,653 आवेदन दर्ज हुए।
अगर अनुमान सही साबित होते हैं और 50,000 अपात्र नाम हटा दिए जाते हैं, तो लगभग 3.93 लाख परिवार ही अंतिम सूची में बचेंगे। इन्हीं परिवारों को आवास निर्माण के लिए सरकारी सहायता राशि मिलेगी।
स्व-घोषणा प्रणाली की कमजोरियां
इस बार सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए खुद से फॉर्म भरने का विकल्प दिया था। मकसद था कि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोग योजना से जुड़ सकें। लेकिन इस सुविधा का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।
बिना किसी जांच-पड़ताल के लोगों ने गलत जानकारी देकर फॉर्म भर दिए। कई संपन्न परिवारों ने भी मौका देखकर अपना नाम शामिल करवा लिया। यह घटना यह साबित करती है कि बिना सख्त निगरानी के आत्म-घोषणा आधारित प्रणाली विफल हो सकती है।
पात्रता की शर्तें
योजना का उद्देश्य उन गरीब परिवारों को मकान उपलब्ध कराना है जिनके पास रहने के लिए पक्का घर नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवार ही इसके हकदार हैं। जिनके पास पहले से पक्का मकान है, वे किसी भी सूरत में इस योजना के लिए योग्य नहीं माने जाएंगे।
आगे की रणनीति
सत्यापन पूर्ण होने के उपरांत अंतिम रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को प्रेषित की जाएगी। उसके बाद जिले को वास्तविक लक्ष्य संख्या आवंटित होगी। फिर पात्र परिवारों को चरणबद्ध तरीके से आवास निर्माण हेतु धनराशि जारी की जाएगी।
यह सफाई अभियान यह संदेश देता है कि सरकार केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। फर्जीवाड़े पर सख्त कार्रवाई का यह संकेत अन्य सरकारी योजनाओं के लिए भी एक मिसाल बनेगा।

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